Category: सामाजिक संदेश

  • अपना समाज

    अपना समाज

    टेक – पायो रे मै तो रामरतन रघुराई ।      सुनो रे गाथा कलयुग का मेरे भाई ।। यह कलिकाल गठरि पापन की, जीव अधम गति पाई । रामनाम आधार बना ले, पाप सभी धुल जाई ।। 1 ।।               पायो रे मै तो रामरतन रघुराई… नानाविधि बहु करम करत है, स्वारथ धरम धराई ।…