जय जय जय हो विश्वविधाता, हर जीवों के जीवनदाता ।
लोक अलोक के सबकुछ ज्ञाता, बंदन तेरी हे सुखदाता ।। 1 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
तू जगतारक श्रृष्टि के चालक, तुम्हें पुकारुँ हे मेरे पालक ।
कृपा करो तुम कृपानिकेता, आया शरण में हे जगदाता ।। 2 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
हे रघुनन्दन हे जगबन्दन , कष्ट निवारो हे दुःखभंजन ।
दूर करो दुःख मेरे विधाता, देर हो गई भक्त बुलाता ।। 3 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
अपनी परीक्षा कठिन हो गई, सभी प्रयास क्यों विफल हो गई ।
किसको पुकारुँ कुछ ना सुहाता, सफल करो हमें आश्रयदाता ।। 4 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
दर्दनिवारक खुशीप्रदायक, मेरे काम में बनो सहायक ।
पुण्यकरम ही मुझको भाता, दुष्टचलन नही पास बुलाता ।। 5 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
भजनभाव को मन में बसा दो, सत्कर्मों का पाठ पढा दो ।
परउपकार का धरम सुहाता, नेक करम से नहि घबराता ।। 6 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
झूठफरेब का नहि कुछ काम, सत्य अहिंसा ही अन्जाम ।
सभी समाज को शांतिप्रदाता, प्यार का सबक सभी को पढाता ।। 7 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
मन से संशय दूर करो, अपनी ईच्छा पूर्ण करो ।
हर मुश्किल आसान हो जाता, तेरी कृपा जिसको मिल जाता ।। 8 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
जब भी मै परलोक में जाऊँ, तेरा सच्चा भक्त कहाऊँ ।
मेरा जनम सार्थक कहलाता, जब इस लोक में फिर नहि आता ।। 9 ।।
बंदन तेरी हे सुखदाता ।
——-इति——


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