दो.- सुख और दुख में भेद है कितना जैसे धरती पाताल ।
पर दोनों का साथ है गहरा हर कोई होत निहाल ।।
टेक – सुख जाए खुशी से, दुख खतम ना होय ।
सुख में अपने सभी हैं, दुख में पूछे ना कोय ।।
सुख की बंशी बजे चैन से, जीवन खिल खिल जाय ।
जो दुख को परखा जीवन में.. सुख को समझे तोय ।। 1 ।।
सुख जाए खुशी से…
यह संसार दुखों का दर्पण, नाना कष्ट दिखाय ।
इस दर्पण में सुख के क्षण तो.. अल्पकाल की सोय़ ।। 2 ।।
सुख जाए खुशी से…
जीवनचक्र चलत हरदम है, सुख दुख इसमें समाय ।
सुख तो केवल छाँव मात्र है.. कुछ ही पल का होय ।। 3 ।।
सुख जाए खुशी से…
खट्टा मीठा तीखा खारा, भोजन स्वाद बनाय ।
सुख दुख तो जीवन के स्वाद हैं.. सबकोई चखते जाय ।। 4 ।।
सुख जाए खुशी से…
यह तन तो सुख को ही चाहे, दुख तो सहा ना जाय ।
प्रभु की मूरत दिल में बसा ले.. दुख का कष्ट न होय ।। 5 ।।
सुख जाए खुशी से…
दुख के बादल आते रहते, धैर्य खतम होई जाय ।
रामभजन में मनको रमा लो.. सुख की बारिस आय ।। 6 ।।
सुख जाए खुशी से…
जीवन के दो पहिए सुख दुख, जीवन चलती जाय ।
मुक्ती तो हरिभक्ति से पाएँ.. राम की सुध में खोय ।। 7 ।।
सुख जाए खुशी से…
——इति——


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